Текст песни
मनवारे। भीतर दीप जला। मनवारे भीतर दीप जला। बाहर क्यों तू भटके रे? जिसको ढूंढे जग के मेले। वो तेरे ही घट में रे। मंदिर ढूंढे, मस्जिद ढूंढे। ढूंढे चारों धाम। अपने मन की आंख न खोले। कैसे मिले वो राम। मनवारे भीतर दीप जला। बाहर क्यों तू भटके रे? माटी का यह तन है पगले। चार दिनों का खेल। आज महल में बैठा राजा। कल माटी की ढेर। ना धन तेरा, ना तन तेरा। ना ये झूठा मान। सांस सांस में नाम बसा ले। यही सच्ची पहचान। मनवारे भीतर दीप जला। बाहर क्यों तू भटके रे? जितना बाँटे उतना बढ़ता। प्रेम लोखा धन। जिसने अपना आप मिटाया। उसमें जागा जन। लोभ मोह की गांठ खोल दे। छोड़ दे झूठी आस। एक पल में बदल सके जीवन। जप ले भीतर सांस। मनवारे। भीतर दीप जला। बाहर क्यों तू भटके रे? जिसको ढूंढे जग के मेले। वो तेरे ही घट में रे। कहे मन से मन की सुन ले। चुप में छिपा जवाब। जिस दिन खुद को जान लिया तू। मिट जाएगा हर ख्वाब। ना काशी में। ना काबा में। ना दूर किसी आकाश। जिस घट में तू प्रेम जगाए। वही मिलेगा प्रकाश। मनवारे भीतर दीप जला। बाहर क्यों तू भटके रे? जिसको ढूंढे जग के मेले। वो तेरे ही घट में रे।
Ganesh Kumar; G — Manva Re Bhitar Dip Jalare
«Manva Re Bhitar Dip Jalare» — Ganesh Kumar; G. Читайте текст песни и подпевайте с караоке-подсветкой: строки текста подсвечиваются в такт музыке. Слушайте онлайн бесплатно или скачайте mp3. Длительность записи — 4:44. Жанр — Этническая.
