Текст песни
धीमी धीमी सी है रोशनी जो चमकती। लिपटी हवा में आसमां की छत पे थिरकती। थोड़ी सी चंचल, थोड़ी सी इसमें खटक है। शयमाती, ढिलाती आँखें, बजाती, बहकती। जुगनु से लड़के कैसे बिखेरे वो रोशनी। फीकी लगे हैं तारों की बस्ती और चाँद भी। इतनी हसीन, इतनी हसीन, इतनी हसीन। गुम मुझे कर दे कहीं। है जहाँ ये दुनिया नहीं। रंगों सी मुस्का बिखेरे वो मेरे शहर। सोचूँ मैं उसको हर रात को चारों पहर। धीमी धीमी सी है रोशनी जो चमकती। लिपटी हवा में आसमां की छत पे थिरकती।
Udit Saxena — Roshni
«Roshni» — Udit Saxena. Читайте текст песни и подпевайте с караоке-подсветкой: строки текста подсвечиваются в такт музыке. Слушайте онлайн бесплатно или скачайте mp3. Длительность записи — 2:50. Жанр — Поп.
